Saturday, March 22, 2008

गजल

अक्षय गोजा
बिना मौत शायद जुदाई न होती
वो लाचारी भी, वो रुलाई न होती

टी.वी. पर ऐसी बेहयाई न होती
तो दुध-पीतों में आशनाई न होती

अगर झूठ ही साथ देता हमेशा
किसी जिन्दगी में सचाई न होती

अगर होता वश में सभी कुछ हमारे
जगत में खुदा की बड़ाई न होती

जमाने की हवा में जो बहते हम भी
तो आदर्श के हित लड़ाई न होती
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