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एहसास

एम० षण्मुखन
हर सफर के तले
किसी से मिलने
या कुछ हासिल करने का
मकसद होता है।
आँख भर देख
सुस्ताने
पसीना पोंछने
बात कर उलझनें
सुलझाने की खातिर
वक्त मयस्सर होता है।
पर टहलने में
गति नहीं होती है।
लगता है
पैर उकसाया गया है,
नापा जा रहा है -
रास्ता।
हर कदम के तले
भरी रहती है जगह।
आखिर
जगह नापते
हाथ लगते हैं
कहीं न पहुँचने का
एहसास
और रुख्सत पर
लौट आने की
तसल्ली मात्र ।

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साक्षात्कार जनसंचार का अनिवार्य अंग है। प्रत्येक जनसंचारकर्मी को समाचार से संबद्ध व्यक्तियों का साक्षात्कार लेना आना चाहिए, चाहे वह टेलीविजन-रेडियो का प्रतिनिधि हो, किसी पत्र-पत्रिका का संपादक, उपसंपादक, संवाददाता। साक्षात्कार लेना एक कला है। इस विधा को जनसंचारकर्मियों के अतिरिक्त साहित्यकारों ने भी अपनाया है। विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में, हर भाषा में साक्षात्कार लिए जाते हैं। पत्र-पत्रिका, आकाशवाणी, दूरदर्शन, टेलीविजन के अन्य चैनलों में साक्षात्कार देखे जा सकते हैं। फोन, ई-मेल, इंटरनेट और फैक्स के माध्यम से विश्व के किसी भी स्थान से साक्षात्कार लिया जा सकता है। अंतरिक्ष में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने अंतरिक्ष यात्री कैप्टन राकेश शर्मा से संवाद किया था, जिसे दूरदर्शन ने प्रसारित किया था। इस विधा का दिन पर दिन प्रचलन बढ़ता जा रहा है।
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