Skip to main content

समय की बचत

नदीम अहमद
डॉक्टर के घर पर उसके चैम्बर में पहुँचते ही बीमारी बताते हुए उसने एक्सरे, ब्लड रिपोर्ट, ई.सी.जी. रिपोर्ट डॉक्टर के आगे रख दी।
''सर, ये जांचे आज ही करवाई है;''
''लेकिन मैंने तो लिखा नहीं''
''सर, पिछली बार भी ऐसा ही हुआ था। दो घण्टे इंतजार के बाद आपने बग़ैर चैकअप किए ये जांचे करवा कर लाने को कहा था। इस बार समय की बचत का ख्याल करते हुए आपकी बताई हुई लैब से ये जांचे करवा ही आया हूँ।''
डॉक्टरा ने चुपचाप जांच रिपोर्ट्‌स पर सरसरी निगाह डाली और दवाईयाँ लिख दी।
***************************
जैनब कॉटेज,
बड़ी कर्बला मार्ग,
चौखूंटी, बीकानेर-०१
***************************

Comments

Popular posts from this blog

हिन्दी साक्षात्कार विधा : स्वरूप एवं संभावनाएँ

डॉ. हरेराम पाठक हिन्दी की आधुनिक गद्य विधाओं में ‘साक्षात्कार' विधा अभी भी शैशवावस्था में ही है। इसकी समकालीन गद्य विधाएँ-संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, आत्मकथा, अपनी लेखन आदि साहित्येतिहास में पर्याप्त महत्त्व प्राप्त कर चुकी हैं, परन्तु इतिहास लेखकों द्वारा साक्षात्कार विधा को विशेष महत्त्व नहीं दिया जाना काफी आश्चर्यजनक है। आश्चर्यजनक इसलिए है कि साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा साक्षात्कार विधा ही एक ऐसी विधा है जिसके द्वारा किसी साहित्यकार के जीवन दर्शन एवं उसके दृष्टिकोण तथा उसकी अभिरुचियों की गहन एवं तथ्यमूलक जानकारी न्यूनातिन्यून समय में की जा सकती है। ऐसी सशक्त गद्य विधा का विकास उसकी गुणवत्ता के अनुपात में सही दर पर न हो सकना आश्चर्यजनक नहीं तो क्या है। परिवर्तन संसृति का नियम है। गद्य की अन्य विधाओं के विकसित होने का पर्याप्त अवसर मिला पर एक सीमा तक ही साक्षात्कार विधा के साथ ऐसा नहीं हुआ। आरंभ में उसे विकसित होने का अवसर नहीं मिला परंतु कालान्तर में उसके विकास की बहुआयामी संभावनाएँ दृष्टिगोचर होने लगीं। साहित्य की अन्य विधाएँ साहित्य के शिल्पगत दायरे में सिमट कर रह गयी...

सवाल उर्दू का -राही मासूम रज़ा

चित्र पर क्लिक करें और पढ़े ।

नफ़ीस आफ़रीदी, साभार इंटरनेट