Thursday, May 15, 2008

कभी कहना कभी कह कर न आना याद रहता है

इफ्तखार नसीम

कभी कहना कभी कह कर न आना याद रहता है
मुझे उस शक्स का हर एक बहाना याद रहता है

कोई भी वक्त हो गम उसका मुझको ढूँढ लेता है
यह ऐसा तीर है जिस को निशाना याद रहता है

निकलते हो तो रस्ते मैं मेरा घर भूल जाते हो
तुम्हें वैसे तो यह सारा ज़माना याद रहता है

हम इन्सां हैं तो कैदे जबर में खामोश रहते हैं
परिंदों को असीरी मैं भी गाना याद रहता है

नसीम उस शख्स को हर हाल में तुम खुश ही देखोगे
जिसे पीरी मैं बचपन का ज़माना याद रहता है

Editor In Chief, Talk Show HostWeekly Pakistan NewsSargam Radio Channel6033 N. Sheridan Rd. Suite 40-JChicago IL 60660
द्वारा - चाँद शुक्ला हदियाबादीhttp://www.radiosabrang.com/

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