देवमणि पाण्डेय
दिल वालों की बस्ती है
यहां मौज और मस्ती है.
पत्थर दिल है ये दुनिया
मजबूरों पर हंसती है.
ख़ुशियों की इक झलक मिले
सबकी रूह तरसती है.
क्यों ना दरिया पार करें
हिम्मत की जब कश्ती है.
हर इक इंसां के दिल में
अरमानों की बस्ती है.
महंगी है हर चीज़ मियां
मौत यहां पर सस्ती है.
उससे आंख मिलाएं,वो
सुना है ऊंची हस्ती है.
द्वारा - चाँद शुक्ला हदियाबादीwww.radiosabrang.com
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on Wednesday, May 14, 2008
at 7:19 PM
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ग़ज़ल
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