Monday, May 12, 2008

एक लटका हुआ अरब

सलेम जुबरान
फ़िलीस्तीनी कवि
अनुवादक अनिल जनविजय
एक लटका हुआ अरब
सबसे ख़ूबसूरत खिलौना है
जिसे बच्चे ख़रीद सकते हैं

ओ नाजी शिविरों में मृत आत्माओं!
यह जो आदमी लटका है
बर्लिन का यहूदी नहीं है
एक अरब है मेरी तरह
यह लटका हुआ आदमी

तुम्हारे भाइयों ने इसे मारा है
तुम्हारे नाजी दोस्तों
जियोन के......
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