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ग़ज़ल

प्राण शर्मा

नफरत की हर गली से निकलने की बात कर
तू प्यार वाली राह पे चलने की बात कर
माना की हर तरफ ही अँधेरी है ज़ोर की
उसका न कर ख़याल संभलने की बात कर
आयी हुई मुसीबतें जाती कभी नहीं
ऐसे सभी ख़याल कुचलने की बात कर
चेहरे पे हर घड़ी ही उदासी भली नहीं
ये खुरदरा लिबास बदलने की बात कर
आएगी अपने आप ही चेहरे पे रौनकें
मन्दिर में दीप की तरह जलने की बात कर
पत्थर सा ही बना रहेगा कब तलक, मियाँ
तू मोम सा कभी तो पिघलने की बात कर
ऐ "प्राण" तेरे होने का एहसास हो जरा
अम्बर में मेघ जैसा मचलने की बात कर
द्वारा - चाँद शुक्ला हदियाबादी www.radiosabrang.com

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साठोत्तरी हिन्दी कथा साहित्य में शिवानी अत्यन्त चर्चित एवं लोकप्रिय कथाकार रही हैं। नारी संवेदना को अत्यन्त आत्मीयता एवं कलात्मक ढंग से चित्रित करने वाली शिवानी की दो दर्जन से अधिक कथाकृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। इन रचनाओं में 'कालिन्दी','अपराधिनी', 'मायापुरी', 'चौदह फेरे', 'रतिविलाप','विषकन्या','कैजा', 'सुरंगमा', 'जालक', 'भैरवी', 'कृष्णवेली', 'यात्रिक', 'विवर्त्त', 'स्वयंसिद्धा', 'गैंडा', 'माणिक', 'पूतोंवाली', 'अतिथि', 'कस्तूरी', 'मृग', 'रथ्या', 'उपप्रेती', 'श्मशान', 'चम्पा', 'एक थी रामरती', 'मेरा भाई', 'चिर स्वयंवरा', 'करिए छिमा', 'मणि माला की हँसी' आदि प्रमुख हैं। इन्होंने उपन्यास, लघु उपन्यास और कहानियों के सृजन के द्वारा साठोत्तरी हिन्दी कथा को पर्याप्त समृद्धि प्रदान की है। इनकी अधिकांश कहानियाँ लघु उपन्यासों, संस्मरण रचनाओं और अन्…