Monday, May 12, 2008

सदा रहे फ़िलीस्तीन

फ़दवा तूकान
फ़िलीस्तीनी कवि
अनुवादक अनिल जनविजय

महान
महान देश
चक्की का पाट घूम सकता है
बदल सकता है
संघर्ष की धुंधली रातों में
पर वे नहीं बदल सकते
बहुत कमज़ोर हैं वे
तुम्हारी रोशनी ख़त्म करने के लिए

तुम्हारी आशाओं में से
फाँसी पर लटके विश्वास में से
चोरी गई शुभ्र मुस्कानों में से
खिलखिलाते हैं तुम्हारे बच्चे

तुम्हारी बर्बादी में से
घोर यंत्रणा में से
जीवन के स्पन्दन और मृत्यु के कम्पन में से
उदित होगा एक नया जीवन

ओ महान देश
ओ गम्भीर जख़्म
ओ मेरे आत्मीय स्नेह
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