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ग़ज़ल

देवमणि पाण्डेय

छ्म छ्म करती गाती शाम
चांद से मिलने निकली शाम.

उड़ती फिरती है फूलों में
रंग बिरंगी तितली शाम.

आंखों में सौ रंग भरे
आज की निखरी निखरी शाम.

यादों के साहिल पर आकर
पल दो पल को उतरी शाम.

ऒढ के सिंदूरी आंचल
हंसती है शर्मीली शाम.

दिन का परदा उतर गया
बड़ी अकेली लगती शाम.

अलग अलग हैं सबके ख़्वाब
सबकी अपनी अपनी शाम.
द्वारा - चाँद शुक्ला हदियाबादीwww.radiosabrang.com

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साक्षात्कार जनसंचार का अनिवार्य अंग है। प्रत्येक जनसंचारकर्मी को समाचार से संबद्ध व्यक्तियों का साक्षात्कार लेना आना चाहिए, चाहे वह टेलीविजन-रेडियो का प्रतिनिधि हो, किसी पत्र-पत्रिका का संपादक, उपसंपादक, संवाददाता। साक्षात्कार लेना एक कला है। इस विधा को जनसंचारकर्मियों के अतिरिक्त साहित्यकारों ने भी अपनाया है। विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में, हर भाषा में साक्षात्कार लिए जाते हैं। पत्र-पत्रिका, आकाशवाणी, दूरदर्शन, टेलीविजन के अन्य चैनलों में साक्षात्कार देखे जा सकते हैं। फोन, ई-मेल, इंटरनेट और फैक्स के माध्यम से विश्व के किसी भी स्थान से साक्षात्कार लिया जा सकता है। अंतरिक्ष में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने अंतरिक्ष यात्री कैप्टन राकेश शर्मा से संवाद किया था, जिसे दूरदर्शन ने प्रसारित किया था। इस विधा का दिन पर दिन प्रचलन बढ़ता जा रहा है।
मनुष्य में दो प्रकार की प्रवृत्तियाँ होती हैं। एक तो यह कि वह दूसरों के विषय में सब कुछ जान लेना चाहता है और दूसरी यह कि वह अपने विषय में या अपने विचार दूसरों को बता देना चाहता है। अपने अनुभ…

समकालीन साहित्य में स्त्री विमर्श

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स्त्री-विमर्श के दर्पण में स्त्री का चेहरा

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