Tuesday, May 13, 2008

माँ

सलेम जुबरान
फ़िलीस्तीनी कवि
अनुवादक अनिल जनविजय


मेरी माँ को धिक्कारो
जिसने एक विदेशी को
अपनी छाती से लगाया
दूध पिलाया
जबकि मैं भूखा हूँ

घृणित है वह
जिसने मेरे बिस्तर पर
एक विदेशी को सुलाया
जबकि मैं उनींदा हूँ

लानत भेजो उस पर
जिसने अपने दिल में
एक विदेशी को बसाया
मुझे निकाल बाहर किया
एक वात्सल्यहीन भगोड़ा बनाया

मेरी माँ को कोसो
निन्दा करो उसकी
सब महिलाओं को धिक्कारो !
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