Sunday, May 4, 2008

खाजाना

नदीम अहमद


नोखा से बस रवाना होते ही कंडक्टर ने बीकानेर का किराया पैंतीस रुपया बताया, टिकट हाथ में रख दिया। दोनों शिक्षिकाएं एक-दूसरे का मुंह देखने लगी। फिर उनमें से एक ने कहा, ''आप शायद इस रूट पर पहली बार आएं है, हम तो हमेशा २५/- रुपये ही देते हैं।''
''आप जो पच्चीस रुपये देती हैं वो लेने वाले कंडक्टर के खाजाने में जाता है और यह जो पैंतीस रुपये लूंगा वो सरकारी खाजाने में जायेंगे।

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