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परिवीक्षा अवधि

नदीम अहमद

स्कूल और कॉलेज के दिनों में नेतागिरी और उदण्डता का पर्याय बन चुका वो शख्स इन दिनों सरकारी नौकरी लगने पर किसी आज्ञाकारी बालक की तरह व्यवहार कर रहा था। उसको जानने वालों के लिए यह चमत्कारी परिवर्तन था। अपने एक परिचित के सामने उसने आखिर राज उगल ही दिया।
''यार! जैसे-तैसे यह परिवीक्षा अवधि पूरी हो जाये, बस। उसके बाद.......!''


जैनब कॉटेज,
बड़ी कर्बला मार्ग,
चौखूंटी, बीकानेर-०१

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प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से संबंधित साक्षात्कार की सैद्धान्तिकी में अंतर

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