Sunday, May 4, 2008

परिवीक्षा अवधि

नदीम अहमद

स्कूल और कॉलेज के दिनों में नेतागिरी और उदण्डता का पर्याय बन चुका वो शख्स इन दिनों सरकारी नौकरी लगने पर किसी आज्ञाकारी बालक की तरह व्यवहार कर रहा था। उसको जानने वालों के लिए यह चमत्कारी परिवर्तन था। अपने एक परिचित के सामने उसने आखिर राज उगल ही दिया।
''यार! जैसे-तैसे यह परिवीक्षा अवधि पूरी हो जाये, बस। उसके बाद.......!''


जैनब कॉटेज,
बड़ी कर्बला मार्ग,
चौखूंटी, बीकानेर-०१

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