Saturday, May 17, 2008

खूब लुभाती मुंबई

देवमणि पाण्डेय

शहर हमारा जो भी देखे उस पर छाए जादू
हरा समंदर कर देता है हर दिल को बेक़ाबू

ताजमहल में ताज़ा काफ़ी जो भी पीने आए
चर्चगेट की चकाचौंध में वो आशिक़ बन जाए

चौपाटी की चाट चटपटी मन में प्यार जगाती है
भेलपुरी खाते ही दिल की हर खिडकी खुल जाती है

कमला नेहरु पार्क पहुंचकर खो जाता जो फूलों में
प्यार के नग़्मे वो गाता है एस्सेल वर्ल्ड के झूलों में

जुहू बीच पर सुबह-शाम जो पानी-पूरी खाए
वही इश्क़ की बाज़ी जीते दुल्हन घर ले आए

नई नवेली दुल्हन जैसी हर पल लगती नई
सबको ऊंचे ख़्वाब दिखाकर खूब लुभाती मुंबई

द्वारा - चाँद शुक्ला हदियाबादी www.radiosabrang.com
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