Saturday, May 3, 2008

आखिरी दाव

नदीम अहमद

अति महत्त्वाकांक्षी पिता जमाने की अंधी दौड़ में अपने पुत्र को आगे रखने के लिए किसी भी हद तक कुछ भी करने को तैयार था।
प्रायोगिक परीक्षा में उसने व्याख्याता पर दबाव बनाया कि उसके पुत्र को उच्चतम नम्बर दिए जाये। उसने लालच भी दिया लेकिन व्याख्याता ईमान के पथ से डिगने को तैयार नहीं था। आखिर हताश, निराश पिता ने आखिरी दाव चल ही दिया कि उक्त व्याख्याता प्रायोगिक परीक्षा में अच्छे नम्बरों की एवज में उनसे रिश्वत मांग रहा है।
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