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खांचों में बंटा आदमी

नदीम अहमद
थुलथुले शरीर वाले सेठजी को मंदिर की सीढ़ियों से उतरकर गरीबों को पैसे बांटते और गायों को गुड़ खिलाते देखकर उधर से गुजर रही वो तवायफ ठिठक गई। उसकी आंखों के आगे पिछली रात का मंजर उभर आया जब ये सेठ किसी पालतु कुत्ते की तरह उसके तलवे चाट रहा था।

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