Thursday, May 1, 2008

दंगे-फसाद कुछ लोगों के बनाये भ्रम हैं : एक साधारण होटल वाला

डॉ. मेराज अहमद
सबसे पहले आप अपना नाम और पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में थोड़ा-सा बतायें?
मेरा नाम चन्द्र प्रकाश है उम्र पचास-पचपन के बीच है। मैं आगरा में पैदा हुआ और मेरी तीन बेटियाँ हैं और एक बेटा है।
आप काम क्या करते है?
मैं एक होटल चलाता हूँ। यही साधारण-सा चाय पानी का।
कब से?
३५ साल हो गए।
आपने पढ़ाई कितनी की है?
मैंने इंटर किया है।
कहाँ से?
आगरा बी.आर. कालेज से किया है।
उसमें पढ़ने-लिखने में आपकी रुचि थी?
हाँ, मेरी बहुत अच्छी परसेंटेज रही है। मैंने डिप्लोमा इंजीनियरिंग भी किया है।
डिप्लोमा इंजीनियरिंग भी किया लेकिन होटल के व्यवसाय में आ गये तो क्या इससे संतुष्ट हैं?
हाँ, अब तो जीवन कट ही रहा है समय ही कितना बचा है? रोजी-रोटी चल ही रही है।
क्या मन में कसक उठती है कि पढ़ाई की और नौकरी नहीं मिली?
नौकरी की थी रेलवे में लेकिन बीमार हो गया इसलिए छूट गई।
बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में रुचि?
बहुत है। बड़ी बच्ची मेरी सऊदी अरब में वहाँ इंटरनेशनल कॉन्वेन्ट में पढ़ाती है। दूसरी भी एम.ए. के बाद शादी हो गई, तीसरी एम.ए. कर चुकी है। बी.एड. की तैयारी कर रही है।
बेटे?
बेटा मेरा इंजीनियरिंग कर रहा है।
आपने अपने बच्चों के अलावा परिवार के दूसरे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के बारे में क्या सोचते हैं?
पढ़ाई-लिखाई बहुत जरूरी है। मेरा तो मानना है कि आधे पेट खाकर बच्चों को पढ़ाना-लिखाना चाहिए।
क्या भविष्य में चाहेंगे कि आपके घर-परिवार के बच्चे इसी व्यवसाय में आयें?
कभी नहीं चाहेंगे।
क्यों नहीं चाहेंगे?
क्योंकि इसमें शांति नहीं है। इसके अलावा दूसरी तरफ देखने का मौका नहीं मिलता है।
आपको ऐसा नहीं लगता कि अगर वह दूसरे पेशे में होगा तो सामाजिक प्रतिष्ठा अधिक होगी?
बिल्कुल, पढ़ने-लिखने के बाद तो कुछ भी कर सकता है। देखिए, पढ़ाई के बल पर आज मेरी बच्ची बाहर है।
क्या आपको बच्ची का उल्लेख करके गौरव की अनुभूति होती है?
बहुत खुशी होती है साहब, बयान नहीं कर सकते हैं।
क्या पढ़ने-लिखने में रुचि है, यानी पुस्तक, अखबार और पत्रिाकाएँ बगैरह पढ़ते हैं?
पढ़ता तो प्रतिदिन हूँ। अखबार-अमर उजाला, इसमें देश की विदेश की जो भी खबरें होती हैं।
किताबें पढ़ने में रुचि है आपकी?
हाँ-हाँ।
कैसी किताबें?
कुछ धार्मिक किताबें और कुछ सामाजिक किताबें पढ़ता रहता हूँ
साहित्य के बारे में कुछ सुना है आपने?
हाँ।
क्या सुना है?
साहित्य कई प्रकार के होते हैं जैसे-सामाजिक साहित्य होता है, आर्थिक यानी बिजनेस परपज से होता है। ज्यादातर मैं बिजनेस के बारे में पढ़ता रहता हूँ।
कहानी, कविता, उपन्यास आदि के बारे में कुछ सुना है?
हाँ।
जो लिखते हैं कैसे लोग होते है?
अच्छे ही होते हैं।
यानी लिखना चाहिए।
जरूर। इससे आने वाली पीढ़ी को लाभ मिलता है।
कभी कुछ साहित्य नहीं पढ़ा?
पढ़ा तो है लेकिन पिछले १० सालों से कुछ नहीं पढ़ा।
पहले क्या पढ़ते थे?
जैसे कहानियाँ बहुत निकलती थीं अखबारों में मडर के केस होत थे।
आजकल?
नहीं
जो भी पढ़ते हैं उसका क्या महत्त्व होता है?
इसके जरिये हम जानकारी लेते हैं कहीं बम फट गया, अक्सर मन में यह भी आता है कि कोई एकाक बम मेरी दुकान में न रख जाए। तो इस तरीके से लाभ है।
कुछ पुस्तकें पढ़ने का मन होता है?
होता तो है लेकिन टाइम नहीं मिल पाता है।
मिले तो कैसी किताबें पढ़ना चाहेंगे?
धार्मिक हों, सामाजिक हों, जीवन अच्छे ढंग से बिताने का संस्कार हो।
आपने कहा कि अब के साहित्य से परिचित नहीं हूँ लेकिन साहित्य के बारे में जानते हैं तो जो साहित्य लिखा जा रहा है उससे परिचित होना चाहेंगे?
हाँ, बिल्कुल।
अच्छा मैं बताता हूँ एक नाम है प्रेमचन्द उनके बारे में कुछ सुना है?
प्रेमचन्द जी की मैंने कहानियाँ पढ़ी हैं। परीक्षाओं में उनकी कहानियों के बारे में पूछा जाता था। उनके नाम से तो खूब परिचित हूँ। उनकी कहानी जैसे दो बैलों की जोड़ी.... और?
ईदगाह?
हाँ।
नशा?
हाँ-हाँ, नशा।
और भी कोई नाम बताइये सोचकर साहित्यकारों का?
याद नहीं।
तुलसीदास का नाम सुना है?
तुलसीदास का, कालीदास का सुना है, सूरदास, कबीर हैं।
आजकल जो आपके आसपास इसी शहर के हैं। उनका नाम सुना है?
.....
अलीगढ़ के मशहूर साहित्यकार गोपाल दास नीरज का नाम सुना है?
उनका नाम पढ़ा है अखबार में, सुना भी है सरकार ने बहुत सारे इनाम भी दिये लेकिन कविताएँ कोई याद नहीं।
आपके होटल में कैसे लोग आते हैं?
सभी तरीके के लोग आते हैं। यूनीवर्सिटी एम्प्लाईज, स्टूडैन्ट्स, नेता वगैरह भी। इसमें दोनों तरह के होते हैं - अच्छे और बुरे।
नेताओं से आपकी है पहचान?
हाँ, जिले के जितने बड़े-बड़े नेता हैं जैसे- विधायक है, एम.पी. है। सबसे पहचान है।
क्या कभी राजनीति पर इन लोगों से बात होती है?
बिल्कुल नहीं! न मेरा राजनीति से लगाव है न ही इन लोगों से कभी काम ही पड़ता है।
आप ऐसी जगह हैं जहाँ अक्सर नेताओं की भाषण और मीटिंग होती हैं क्या उसे कभी सुनने जाते हैं।
बिल्कुल नहीं?
अच्छा ये जो आज आन्दोलन दलित का चला है इसके बारे में कुछ सुना है?
देखो जी, आन्दोलन वान्दोलन कुछ नहीं यह तो राजनीति है, दलित आजकल कौन हैं? जो गलत आमाल करता है शराब पीता है। दलितों की यही पहचान है।
कभी आपने सोचने की कोशिश की? वह शराब और गलत आमाल क्यों करता है?
इसमें दो चीजें होती है एक तो माहौल ऐसा होता है और दूसरा संस्कार ऐसा होता है जो नहीं भी पीने वाला होता है, वह भी पीने लगता है। ऐसा होना नहीं चाहिए। अगर छोड़ दें तो बच्चे पढ़-लिख सकते हैं?
आपने बताया कि आपके होटल में तरह-तरह के लोग आते हैं तो एक ग्राहक के बजाए उनसे एक आदमी की हैसियत से आये तो उनसे मिलकर आपको कैसा लगता है।
अच्छा लगता है। खासतौर से जो स्टूडैन्ट आते हैं उनसे मिल करके बहुत अच्छा लगता है।
अच्छा चन्द्रप्रकाश जी यह बताइये कि समाज और देश के जो हालात कैसे हैं?
बहुत बुरे है राजनीति ने सबसे ज्यादा इसे खराब कर रखा है। हमारे देश की राजनीति विदेशों पर निर्भर हो गयी है। लगता है उनका विदेशों में कोई कन्टेक्ट है जबकि हमारे अपने अन्दर कोई कमी नहीं। नेता लोग चीजों को सही से समझते नहीं। महँगाई को ही ले लीजिए कितना खरीदना है कितना बेचना है अगर सही से हिसाब रखते हो तो क्या मँहगाई इतनी बढ़ती।
कहीं आप भ्रष्टाचार की बात नहीं कर रहे हैं।
बिल्कुल, यही तो गरीबी की जड़ में है।
क्या आप अपनी सामाजिक हैसियत से संतुष्ट हैं।
हाँ, असल बात तो परिवार की होती है। अगर परिवार सही है तो सब ठीक। मान-सम्मान उसी से मिलता है। संस्कार अच्छे होने चाहिए फिर समाज अपने आप ही सम्मान देता है।
आपको सबसे अच्छा नेता कौन लगता है?
मनमोहन सिंह इस समय सबसे अच्छे नेता हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आपको कौन पार्टी सबसे अधिक पसंद है?
कोई नहीं, यहाँ तो किसी ने हिन्दूवाद फैलाया है किसी ने दलितवाद फैलाया है, मुलायम सिंह ने गुण्डावाद फैलाया है। किसी से संतुष्ट नहीं हूँ।
तो फिर कैसी होनी चाहिए राजनीति?
साफ सुथरी होनी चाहिए। न हिन्दूवाद हो न मुस्लिमवाद हो।
अच्छा आप ऐसे शहर में रहते है। जो दंगों के लिए मशहूर है आपने भी दंगे झेले होंगे इस पर कुछ कहना चाहेंगे।
मेरा तो साफ कहना है कि आवाम को इससे कुछ लेना देना नहीं है। दरअसल पूँजीपति अपने लाभ के लिए व्यवसाय में फायदे के लिए करवाते हैं। एक बार दंगा हुआ माल को गोदाम में जमा किया और बाद में लाभ ही लाभ। हफ्ते में करोड़ो के माल बना लेते हैं।
दंगे?
पूँजीपतियों के खेल हैं।
लड़ाई तो आवाम लड़ता है आपस में?
वह बिल्कुल नहीं लड़ना चाहता लेकिन उन्हें भरमा के किसी को कुछ पैसे देके या दारू पिला के दंगों में झौंक दिया जाता है।
आप कैसे इलाके में रहते हैं?
जिस इलाके में रहता हूँ वहाँ ९०-९५ प्रतिशत मुस्लिम आबादी है।
तो क्या आपको या आपके परिवार को कोई परेशानी होती है?
कोई परेशानी नहीं होती है। हम लोग मिल जुल के रहते हैं। हमारे कई मुस्लिम दोस्त हैं जो हमारे सुख-दुख में हमारे साथ खड़े रहने के लिये तैयार रहते हैं। कभी-कभी दंगा फंगा हो भी जाते है तो मुझसे लोग यही कहते हैं कि निशंक होकर सोवो हम लोग हैं।
यानी कि...?
यह दंगे फसाद कुछ लोगों के बनाये हुए और भ्रम हैं।
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1 comment:

राज भाटिय़ा said...

बिलकुल सही बात, हम सहमत हे आप के ओर चन्द्र प्रकाश के विचारो से,