Wednesday, April 30, 2008

कविता

वेद पी० शर्मा




हम नहीं बोलेगें
कड़ी मेहनत ही चीखेगी
इंतहा सहने की खत्म जब होगी
पूंजीपतियों के उद्यागों की नींव दरक रही होगी
है बात सीधी और सच
दायरे में है चिंगारी
जिस दिन भी फैलेगी
अत्याचार,शेषणता लपटों में जल रही होगी
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