Friday, April 4, 2008

अधूरी कहानी

जिजिथ हरिदास
वो यादें तुम्हारी
वो बातें तुम्हारी
जो हमको सताती रही ..........
न जाने कब से
उम्मीदें कुछ बाकी है
मुझे फिर भी
तेरी याद आती है ................
मेरा दिल मेरा सफर
ढूढें तुझे फिर क्यों नजर
लेकर यादें तेरी
रातें मरी कटी
मुझसे बात तेरी
करती है चाँदनी ..............
यह है मेरी अधूरी कहानी

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