Sunday, April 20, 2008

नई पीढी के नाम

वीरेन्द्र जैन
मुझको तो अगली पीढी को केवल यही सिखाना है
तुमको अपने मॉं बापों की बातों में नहिं आना है
हम तुमको कुछ नीति सिखायें
ऐसी तो सामर्थ्य नहीं
हम तुमको उपदेश पिलायें
तो उसका कुछ अर्थ नहीं
हम जीवन भर रहे नपुंसक
हमने अत्याचार सहे
बेईमानियॅां हॅंस कर टालीं
हमने भ्रष्टाचार सहे
भूले से ऐसी पीढी को नहिं आदशॅ बनाना है
मुझको तो अगली पीढी को केवल यही सिखाना है
तुमको अपने मॉं बापों की बातों में नहिं आना है
हमने शोषण होते देखा
तो अपना मुंह फेर लिया
हमने ऑंख मूंद कर झेला
जिसने जो अंधेर किया
कायरता की सहनशीलता
हम लेकर के आये हैं
हमें दिखायीं ऑंखें जिसने
हमने दॉंत दिखाये हैं
तुम नकार दो इस पीढी को तुमको आगे जाना है
मुझको तो अगली पीढी को केवल यही सिखाना है
तुमको अपने मॉं बापों की बातों में नहिं आना है
जो ढांचा बनवाया हमने
केवल एक घोंसला है
हमने जो विकास सौंपा है
पूरी तरह खोखला है
सारी न्याय व्यवस्था तुमको
न्याय नहीं दे पायेगी
लोकतंत्र का लोक दिखावा
झूठा एक चोंचला है
नई व्यवस्था लाना है तो तुमको इसको ढाना है
मुझको तो अगली पीढी को केवल यही सिखाना है
तुमको अपने मॉं बापों की बातों में नहिं आना है
***********************************************

No comments: