Monday, April 28, 2008

गुरू

अश्फाक कादरी
भैयाजी चुनाव जीत गये! सलि जयघोष से गूंज उठा । जीत के ढोल बनजे लगे। उनके समर्थक खुशी से नाचने लगे। गुलाल उछलने लगा। कार्यकर्ताओं ने चैन भरी सांस ली। उनके प्रमाण पत्र लेकर जब भैयाजी बाहर निकले तो जाने-अनजाने समर्थकों ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया। कंधों पर उठाकर जीप पर बिठा दिया और जुलूस बस्ती की ओर चल पड़ा।

तभी भैयाजी की नजर दूर खड़े एक फटेहाल आदमी पर पड़ी, जो काफी समय से हाथ हिलाकर उनका अभिवादन कर रहा था। उन्हें कुछ याद आने लगा इस शहर में अपने गांव से खाली हाथ आये भैयाजी का खुले आसमान के नीचे बसेरा था।

बेरोजगारी ने उन्हें जुर्म की दुनिया में धकेल दिया था। नई-नई बसी बस्ती में भैयाजी ने जमीनों पर कब्जा, जुआ, सट्टे का कारोबार शुरू कर दिया था जिससे उनका ठोर ठिकाना बनने लगा था, मगर पुलिस के रिकार्ड में वे जल्द ही हिस्ट्रीशीटर बन गये। उनके घर पुलिस के छापे पड़ने लगे। एक बार जब पुलिस का छापा पड़ा तो उनकी हाथापाई पुलिस से हो गयी। इसी लुका छिपी में भैया की मुलाकात एक मस्त मौला आदमी से हुई, जिसने उन्हें सबक दिया कि अगर तुम्हें इज्जत की जिन्दगी गुजारनी है तो नेता बन जा, नहीं तो कुत्ते की मौत मारा जायेगा ।

वह दिन और आज का दिन भैयाजी ने नेतागिरी की राह पकड़ी तो विपक्षी पार्टी के कार्यकर्ता बन गये। विपक्षी पाटी के नेताजी का इतिहास भी भैयाजी जैसा ही था जो वे आज नेतागिरी की आड़ में गुण्डागर्दी कर रहे थे। उनके इशारे में भैयाजी अपनी बस्ती में काम करने लगे, अब पुलिस उन पर हाथ डालने से कतराने लगी। नेताजी के साथ रात दिन काम करते हुये भैया ने अपनी स्थिति और मजबूत कर ली इस बार जब चुनाव आये तो उन्हें इस क्षेत्र का टिकट मिला और वे साम दाम दंड के बल पर यह चुनाव जीत गये। आज यह मुकाम उसी मस्तमौला आदमी की सीख पर मिला था। जो सामने फटेहाल हालत में खड़ा था, जो उनका गुरू था।

भैयाजी ने जीप रूकवाई और उस फटेहाल आदमी के पांव छू लिये। समर्थक कुछ समझ नहीं सके। भैयाजी का यह पांव छूना गरीबों के प्रति उनका सम्मान के रूप में लिया। वे जय जय कार कर उठे और जुलूस आगे बढ़ गया।

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