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कविता

वेद पी० शर्मा
गर्मी में हांफता
जाड़े में दांत कटकटाता
द्वार पर दिन-रात दस्तक लगाती फिक्र
बिटिया के हाथ पीले करने की
छोटे बेटे को स्कूल भेजने की
बीमार पत्नी को दवा के लिए
इसी आस में
अब जो सरकार आएगी कुछ तो ध्यान लगाएगी
आ गई सरकार पर न छोड़ा दामन
चिन्ता ने एक गरीब पिता का अभी तक
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