Wednesday, April 30, 2008

राजनीति

अश्फाक कादरी
नेताजी के घर पर कोहराम मचा था। उनके तीन दिन से लापता लाडले बेटे की क्षत विक्षत लाश शहर के गंदे नाले में मिली थी। नाते रिश्तेदार, कार्यकर्ता रोते बिलखते नेताजी के घर आ रहे थे, बढ़ चढ़कर अपनी पीड़ा और शोक बयान कर रहे थ, मगर नेतजी अपने ड्रांइंगरूम में पुलिस अधिकारियों के साथ सोच में डूबे थे। लाडले के हत्यारों को पता चल गया था, उसी के दोस्तों ने शराब के नशे में किसी बात पर उसे मार डाला था। मारपीट में मौत हाने पर लाश शहर के गंदे नाले में फेंक कर उसकी तलाश में उसके परिवार के साथ सहयोग में जुट गये थे। जब हत्या का राज खुलने पर पुलिस नेताजी से रिपोर्ट लिखने का आग्रह करी रही थी मगर नेताजी कोई जवाब देने के बजाय सोच में डूबे थे।

एकाएक नेताजी की आखें में चमक उभर आयी और बोले इस हत्या में आपने जिन लड़कों के नाम बताये है। उनका कोई दोष नहीं है। मेरे बेटे की हत्या में गहरी साजिश रची गयी हैं। यह मेरे राजनीतिक विरोधियों की चाल है। मेरे बेटे को मेरे प्रतिद्वन्दी नेता भैयाजी ने मरवाया है। आप उसे तत्काल गिरफ्‌तार करें।

मगर सर, गिरफ्‌तार लड़कों से पूछताछ में भैयाजी का कोई नाम सामने नहीं आया यह तो उनकी आपसी मारपीट का परिणाम है, पुलिस अधिकारी ने समझाना चाहा।

मैं कह रहा हूं कि यह मेरे राजनैतिक दुशमन भैयाजी की चाल है, अगर आप उसे गिरफ्‌तार नही करना चाहते तो मैं आंदोलन छेड़ दूंगा, धरना दूंगा, प्रदशॅन करूंगा, इस हत्या के खिलाफ हमारे कार्यकर्ता जान लड़ा देंगे। नेताजी पूरे जोश में बोले। अपनी चमक को छिपाते हुए वे भी घर के कोहराम में फफक कर शामिल हो गये। नेताजी को मानों राजनीतिक मुद्दा मिल गया था।
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