Tuesday, April 8, 2008

वक्त

समर अय्यूब
कहते है वक्त से पहले इन्सान को कुछ हासिल नहीं होता हर इन्सान की ख्वाईश वक्त की मौहताज रहती हैं। फिर चाहे वो शोहरत हो या दौलत हो या मौत हो या दिल से निकली ख्वाईश हो या कोई आह हो। यह कहानी भी एक ऐसे शख्स की है जो वक्त को भूलकर दुनिया की शह पर भरोसा कर बैठा जो वक्त की खुद मौहताज हैं। यह सब जानते हुए भी फिर न जाने वक्त को भूल औरों से उम्मीदें लगाये बैठे है जहाँ उसको सिर्फ नाकामयाबी हासिल होती हैं।

- ये कहानी कुछ दोस्तों की हैं जो एक छोटे से गाँव में रहा करते थे। एक दिन सब तय करते है कि हम गाँव छोड़कर किसी शहर में रहेगें। सब चले जाते हैं और वो एक बहुत बड़े शहर में रहने लगते हैं। उन में कुछ बहुत अमीर भी थे कुछ गरीब भी थे। उनमें एक लड़का था जो बस जिंदगी में बहुत बड़ा आदमी बनना चाहता था। एक दिन अचानक इसे कोई मदद की जरूरत महसूस हुई तो वह घर से बाहर निकला और चीखने लगा कोई मेरी मदद कर सकता हैं। वहां से उनमें से एक दोस्त अपनी गाड़ी से निकला उसने आवाज दी तुम मेरी मदद कर सकते हो उसने कहा कि मुझे माफ कर दो मेरी गाड़ी में तुम्हारे लिये जगह नहीं हैं और कह के आगे चला गया। फिर थोड़ी देर बाद एक आदमी और गुजरा और उसने आवाज दी क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं। तो वो शक्स अपनी जिंदगी में इतना मसरूफ था कि जब उसने आवाज दी तो उसने सुनी ही नहीं और चलता चला गया। फिर हार कर वो वही बैठ गया और सोचने लगा कि क्या दुनिया में कोई ऐसा नहीं है जो मेरी मदद कर सके ये सोचकर चीखने लगा कि क्या कोई है जो मेरी मदद करेगा। अरे कोई तो मेरी मदद करों थोड़ी देर बाद एक आदमी आया और बोला में तुम्हारी मदद करूगाँ वो फौरन उसके गले लग गया और उसक साथ चला गया। और यहाँ तक कि खुशी के मारे पूछना भूल गया कि तुम्हारा नाम क्या है और किसी ने तो मेरी मदद की नहीं तुम क्यों कर रहे हो मेरी मदद फिर जब उसकी मदद पूरी हो गई तो जिस शक्स ने उसकी मदद की उसने पूछा कि क्या तुम मेरा नाम नहीं पूछोगे कि मैनें तुम्हारी मदद क्योंकि वो बोला मुझे माफ करियेगा में खुशी के मारे आप से पूछना भूल गया। फिर उसने पूछा कि तुम्हारा नाम क्या हैं। और तुमने मेरी मदद क्यों कि उसने कहा दोस्त मेरा नाम वक्त है और ये भी कहा कि - “दोस्त दुनिया में आदमी आपस में एक दूसरे का जरिया तो बन जायेगा लेकिन वो मोहताज मेरा ही रहेगा।”
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