Thursday, April 24, 2008

भक्ति

सिद्धेश्वर
ईश्वर को हम
बस! इतना जानते हैं....
उनकी मूर्तियां गढ़कर
बाजार में बेच आते हैं......!
तब/जाकर
दो सूखी रोटियां पाते हैं !!

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