Thursday, April 24, 2008

सांस्कृतिक आयोजन के अवसर

वीरेन्द्र जैन
नाच उठे चूहे पेटों में
भूख गीत गाये
ऐसे सांस्कृतिक आयोजन
के अवसर आये

वस्त्रों के अभाव में
नारी अंग प्रदशर्न हो
हर निर्धन बस्ती आयोजित
ऐसे फैशनो
वीतराग हो गये आदमी
बिन दीक्षा पाये
ऐसे सांस्कृतिक आयोजन
के अवसर आये

हैं धृतराष्ट्र शिखंडी जैसे
नायक नाटक के
दशर्क की किस्मत में लिक्खे
हैं केवल धक्के
उठती गिरती रही यवनिका
दाएं से बाएं
ऐसे सांस्कृतिक आयोजन
के अवसर आये
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