Wednesday, December 31, 2008

GAZAL

फ़ैज़ अहमद फैज़




सितम सिखलाएगा रस्मे-वफ़ा ऐसे नहीं होता

सनम1 दिखलाएँगे राहे-ख़ुदा ऐसे नहीं होता

गिनो सब हसरतें जो ख़ूँ हुई हैं तन के मक़तल2 में
मेरे क़ातिल हिसाबे-खूँबहा3, ऐसे नहीं होता

जहाने दिल में काम आती हैं तदबीरें न ताज़ीरें4
यहाँ पैमाने-तललीमो-रज़ा5 ऐसे नहीं होता

हर इक शब हर घड़ी गुजरे क़यामत, यूँ तो होता है
मगर हर सुबह हो रोजे़-जज़ा6, ऐसे नहीं होता

रवाँ है नब्ज़े-दौराँ7, गार्दिशों में आसमाँ सारे
जो तुम कहते हो सब कुछ हो चुका, ऐसे नहीं होता
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1. मूर्ति, पत्थर 2. हत्यास्थल 3. ख़ून के बदले का हिसाब4. न युक्तियाँ, न सज़ाएँ 5. स्वीकृति की प्रतिज्ञा6. प्रलय का दिन7. युग की धड़कन 8. संकटों

2 comments:

"अर्श" said...

नव वर्ष पे आपको तथा आपके पुरे परिवार को मेरे तरफ़ से बधाई और मगलाकमानाएं ......

अर्श

seema gupta said...

"नव वर्ष २००९ - आप के परिवार मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं "

regards