Wednesday, December 24, 2008

GAZAL

फ़िराक़ गोरखपुरी



बदलता है जिस तरह पहलू ज़माना
यूँ ही भूल जाना, यूँ ही याद आना

अजब सोहबतें हैं मोहब्बतज़दों1 की
न बेगाना कोई, न कोई यगाना2

फुसूँ3 फूँक रक्खा है ऐसा किसी ने
बदलता चला जा रहा है ज़माना

जवानी की रातें, मोहब्बत की बातें
कहानी-कहानी, फ़साना-फ़साना

तुझे याद करता हूँ और सोचता हूँ
मोहब्बत है शायद तुझे भूल जाना

1.प्रेम के मारे हुए, 2. आत्मीय, 3. जादू

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