Thursday, December 18, 2008

तू नहीं आया

अमृता प्रीतम




चैत ने करवट ली
रंगों के मेले के लिए
फूलों ने रेशम बटोरा-
तू नहीं आया

दोपहरें लम्बी हो गयीं,
दाख़ों को लाली छू गयी
दराँती ने गेहूँ की बालियाँ चूम लीं-
तू नहीं आया

बादलों की दुनिया छा गयी,
धरती ने हाथों को बढ़ाया
आसमान की रहमत पी ली-
तू नहीं आया

पेड़ों ने जादू कर दिया,
जंगल से आयी हवा के
होठों में शहद भर गया-
तू नहीं आया

ऋतु ने एक टोना कर दिया,
और चाँद ने आ कर
रात के माथे पर झूमर लटका दिया-
तू नहीं आया

आज तारों ने फिर कहा,
उम्र के महल में अब भी
हुस्न के दीये से जल रहे-
तू नहीं आया

किरणों का झुरमुट कह रहा,
रातों की गहरी नींद से
उजाला अब भी जागता-
तू नहीं आया

1 comment:

अल्पना वर्मा said...

अमृता प्रीतम की यह कविता बहुत पसंद आई.धन्यवाद.