Friday, December 5, 2008

सच

शंकरानंद


यह कौन सा सय है कि
झूठ निकला है घर से बाहर
आ गया है सड़क पर
और हंस रहा है जोर जोर से
झूठ भाग रहा है बदहवास
पीछे पीछे दौड़ रहा है सच
झूठ गिर पड़ा है
झूठ चाट रहा है धूल
बगल में खड़ा
पसीना पोछ रहा है सच
धीरे-धीरे मुसकरा रहा है सच

1 comment:

परमजीत बाली said...

बढि़या प्रस्तुति।