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अच्छा था

सीमा गुप्ता

तेरी यादों में जल जाते तो अच्छा था,

शबनम की तरह पिघल जाते तो अच्छा था.


इन उजालों में मिले हैं वो दर्द गहरे,

हम अंधेरों में बदल जाते तो अच्छा था.


मेरी परछाईं से भी था शिकवा उनको,

ये चेहरे ही बदल जाते तो अच्छा था.


क्यों माँगा था तुझे उमर भर के लिए,

अपना ही सहारा बन जाते तो अच्छा था.


यूं बरसा के भी सावन प्यासा ही रहा,

हम ही समुंदर बन जाते तो अच्छा था.


क्यों संभाला था ख़ुद को एक मुकाम के लिए,

हम यूं ही टूट के बिखर जाते तो अच्छा था.
चाँद और सितारे तो नहीं मांगे थे हमने,

काश अपने भी मुकद्दर सँवर जाते तो अच्छा था

Comments

Anonymous said…
चाँद और सितारे तो नहीं मांगे थे हमने, काश अपने भी मुकद्दर सँवर जाते तो अच्छा था


अच्छी है

venus kesari

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