Sunday, September 7, 2008

अमानत

सीमा गुप्ता



अमानत मे अब और खयानत ना की जाए ,
आहें-शरर -फीशां आज उन्हें लौटाई जाए...
हिज्र-ऐ-यार मे जो हुआ चाक दामन मेरा,
दरिया-ऐ-इजतराब उनके सामने ही बहाई जाए
(आहें-शरर -फीशां - चिंगारियां फैंकने वाली आहें
हिज्र-ऐ-यार - प्रेमी का विरह
दरिया-ऐ-इजतराब- बेचेनी का दरीया)

No comments: