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आंख भर के

सीमा गुप्ता


ना आंख भर के देखा ही किए ,
ना सरगोशीयों की कोई बारात थी ,

मुद्दत से जिसकी तडपते रहे

क्या ये वही मुलाकत थी ...????

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हिन्दी साक्षात्कार विधा : स्वरूप एवं संभावनाएँ

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