Saturday, September 13, 2008

निगाहे-नाज़

सीमा गुप्ता

बेज़ारी जान की थी या,
किसी गम की गीरफ्तारी थी,
अंधेरी रात मे भी,
" रोशन रूखे- यार देखा"
शायद ये निगाहे-नाज़ की बीमारी थी

(बेज़ारी - उदासीनता )
(रूखे- यार - प्रेमिका का चेहरा)
(निगाहे-नाज़ - चंचल आँख)

1 comment:

makrand said...

nigahey naaz
what a word crafted
regards