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निगाहे-नाज़

सीमा गुप्ता

बेज़ारी जान की थी या,
किसी गम की गीरफ्तारी थी,
अंधेरी रात मे भी,
" रोशन रूखे- यार देखा"
शायद ये निगाहे-नाज़ की बीमारी थी

(बेज़ारी - उदासीनता )
(रूखे- यार - प्रेमिका का चेहरा)
(निगाहे-नाज़ - चंचल आँख)

Comments

makrand said…
nigahey naaz
what a word crafted
regards

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