Tuesday, September 9, 2008

शबे-फुरकत

सीमा गुप्ता


" शबे-फुरकत थी ,
"और"

जख्म - पहलु में,

कोहे - गम ने की ,

शब- बेदारीयाँ हमसे...



(शबे फुरकत- विरह की रात ,
कोहे - गम- दुःख का पहाड़ ,
शब - बेदारीयाँ - रात को जागना )

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