Skip to main content

डा. राही मासूम रजा के कथा साहित्य में विवाह के प्रति बदलते दृष्टिकोण

सलीम आय. मुजावर



नारी ब्रह्म विद्या है, श्रद्धा है, शक्ति है, पवित्राता है, वह सब कुछ है, जो इस संसार में सर्वश्रेष्ठ के रूप में दृष्टिगोचर होती है, नारी कामधेनु है, अन्नपूर्णा है, सिद्धी है, रिद्धि है और वह सब कुछ है, जो मानव प्राणी के समस्त अभावों, संकटों का निवारण करती है, यदि नारी को श्रद्धा की भावना अर्पित कि जाए तो वह विश्व के कण-कण को स्वर्गीय भावनाओं से ओत-प्रोत कर सकती है। नारी एक संतान शक्ति वह आदिकाल से सामाजिक दायित्व को अपने कंदे पर उठाये आ रही है। जिन्हें केवल पुरुषों के कंधे पर डाल दिया जाता, तो वह कब का लड़खड़ा गया होता, भौतिक जीवन की लालसाओं को उसकी पवित्राता ने रोका और सीमाबद्ध करके उसे प्यार की दिशा दी। नारी के विषय में पुराणों में यह श्लोक अंकित है-

विद्या समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रिायां समस्ता सकला जगत्सु।

त्वथैकया पूरितामन्वयेतत का तैं स्तुति स्तव्यपरा परोकिता।।

अर्थात्- हे देवी! संसार की समस्त विधाएं तुमसे निकली है और सब स्पृहाएं ही स्वरूप है, समस्त विश्व एक तुम्हीं से पूरित है। अतः तुम्हारी स्तुति किस प्रकार की जाए? जहां तक नारी शब्द का प्रश्न है वह नर की ही तरह नृ धातु से बना है, इसका अर्थ क्रियाशील रहने वाला नर है और क्रियाशील रहने वाली नारी भी है ऋग्वेद के दशम मण्डल के 159 में सुक्त में शची का गौरव वर्णित है, शची का कथन है-

अहम् कुतूरहम मूर्धाऽमुग्रा विवाचिनी ममेदनु क्रंतु पतिः सोहानाया उपाचरेत।।

अर्थात् मैं ज्ञान में अग्रगण्य हूँ, मैं स्त्रिायों में मूर्धन्य हूँ, मैं उच्चकोटि की वक्ता हूँ मुझ विपयणी की इच्छानुसार मेरा पति आचरण करता है।

शेष भाग पत्रिका में..............

Comments

Popular posts from this blog

साक्षात्कार

प्रो. रमेश जैन
साक्षात्कार जनसंचार का अनिवार्य अंग है। प्रत्येक जनसंचारकर्मी को समाचार से संबद्ध व्यक्तियों का साक्षात्कार लेना आना चाहिए, चाहे वह टेलीविजन-रेडियो का प्रतिनिधि हो, किसी पत्र-पत्रिका का संपादक, उपसंपादक, संवाददाता। साक्षात्कार लेना एक कला है। इस विधा को जनसंचारकर्मियों के अतिरिक्त साहित्यकारों ने भी अपनाया है। विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में, हर भाषा में साक्षात्कार लिए जाते हैं। पत्र-पत्रिका, आकाशवाणी, दूरदर्शन, टेलीविजन के अन्य चैनलों में साक्षात्कार देखे जा सकते हैं। फोन, ई-मेल, इंटरनेट और फैक्स के माध्यम से विश्व के किसी भी स्थान से साक्षात्कार लिया जा सकता है। अंतरिक्ष में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने अंतरिक्ष यात्री कैप्टन राकेश शर्मा से संवाद किया था, जिसे दूरदर्शन ने प्रसारित किया था। इस विधा का दिन पर दिन प्रचलन बढ़ता जा रहा है।
मनुष्य में दो प्रकार की प्रवृत्तियाँ होती हैं। एक तो यह कि वह दूसरों के विषय में सब कुछ जान लेना चाहता है और दूसरी यह कि वह अपने विषय में या अपने विचार दूसरों को बता देना चाहता है। अपने अनुभ…

हिन्दी साक्षात्कार विधा : स्वरूप एवं संभावनाएँ

डॉ. हरेराम पाठक
हिन्दी की आधुनिक गद्य विधाओं में ‘साक्षात्कार' विधा अभी भी शैशवावस्था में ही है। इसकी समकालीन गद्य विधाएँ-संस्मरण, रेखाचित्र, रिपोर्ताज, आत्मकथा, अपनी लेखन आदि साहित्येतिहास में पर्याप्त महत्त्व प्राप्त कर चुकी हैं, परन्तु इतिहास लेखकों द्वारा साक्षात्कार विधा को विशेष महत्त्व नहीं दिया जाना काफी आश्चर्यजनक है। आश्चर्यजनक इसलिए है कि साहित्य की अन्य विधाओं की अपेक्षा साक्षात्कार विधा ही एक ऐसी विधा है जिसके द्वारा किसी साहित्यकार के जीवन दर्शन एवं उसके दृष्टिकोण तथा उसकी अभिरुचियों की गहन एवं तथ्यमूलक जानकारी न्यूनातिन्यून समय में की जा सकती है। ऐसी सशक्त गद्य विधा का विकास उसकी गुणवत्ता के अनुपात में सही दर पर न हो सकना आश्चर्यजनक नहीं तो क्या है।
परिवर्तन संसृति का नियम है। गद्य की अन्य विधाओं के विकसित होने का पर्याप्त अवसर मिला पर एक सीमा तक ही साक्षात्कार विधा के साथ ऐसा नहीं हुआ। आरंभ में उसे विकसित होने का अवसर नहीं मिला परंतु कालान्तर में उसके विकास की बहुआयामी संभावनाएँ दृष्टिगोचर होने लगीं। साहित्य की अन्य विधाएँ साहित्य के शिल्पगत दायरे में सिमट कर रह गयी …

प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से संबंधित साक्षात्कार की सैद्धान्तिकी में अंतर

विज्ञान भूषण
अंग्रेजी शब्द ‘इन्टरव्यू' के शब्दार्थ के रूप में, साक्षात्कार शब्द का प्रयोग किया जाता है। इसका सीधा आशय साक्षात्‌ कराना तथा साक्षात्‌ करना से होता है। इस तरह ये स्पष्ट है कि साक्षात्कार वह प्रक्रिया है जो व्यक्ति विशेष को साक्षात्‌ करा दे। गहरे अर्थों में साक्षात्‌ कराने का मतलब किसी अभीष्ट व्यक्ति के अन्तस्‌ का अवलोकन करना होता है। किसी भी क्षेत्र विशेष में चर्चित या विशिष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले व्यक्ति के सम्पूर्ण व्यक्तित्व और कृतित्व की जानकारी जिस विधि के द्वारा प्राप्त की जाती है उसे ही साक्षात्कार कहते हैं।
मौलिक रूप से साक्षात्कार दो तरह के होते हैं -१. प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार २. माध्यमोपयोगी साक्षात्कार
प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार का उद्देश्य और चरित्रमाध्यमोपयोगी साक्षात्कार से पूरी तरह भिन्न होता है। इसका आयोजन सरकारी या निजी प्रतिष्ठानों में नौकरी से पूर्व सेवायोजक के द्वारा उचित अभ्यर्थी के चयन हेतु किया जाता है; जबकि माध्यमोपयोगी साक्षात्कार, जनसंचार माध्यमों के द्वारा जनसामान्य तक पहुँचाये जाते हैं। जनमाध्यम की प्रकृति के आधार पर साक्षात्कार भ…