Thursday, November 27, 2008

कविता

इला प्रसाद

अँधेरे और उदासी की बात करना
मुझे अच्छा नहीं लगता।
निराशा और पराजय का साथ करना
मुझे अच्छा नहीं लगता,
इसलिए यात्रा में हूँ।
अँधेरे में उजाला भरने
और पराजय को जय में बदलने के लिए
चल रही हूँ लगातार...

2 comments:

नारदमुनि said...

good luck, chalte rahiye. narayan narayan

Vijay Kumar Sappatti said...

bahut sundar bhaav,

jeevan chalne ka hi naam hai ..

badhai

vijay