Thursday, November 20, 2008

यह गुलाम देश है

धर्मवीर भारती

गुलाब मत यहाँ बिखर
पराग मत यहाँ बिखर
यह गुलाम देश है !
ये दास भावना
ये गीले-गीले गीत औ’ उदास कल्पना
हैं यही गुलाम देश की निशानियाँ
बेहयाई का महज यहाँ गुजर बसर !
यह गुलाम देश है !
ये सूने-सूने गाँव
ये भूखे-सूखे पंजरों के लड़खड़ाते पाँव
ये नहीं है जिन्दगी ये मौत की छाँव
आदमी यहाँ पिये हैं मौत का ज़हर
ये गुलाम देश हैं।
तू बन यहाँ प्रसून
तेज कण्टकों का आज काम है यहाँ
टूटने से पहले चुभ कर चूस ले दो बूँद खून
है यहाँ रहम गुनाह भूल कर रहम न कर !
यह गुलाम देश है !!

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