Monday, November 17, 2008

कुंती का लाल

हस्सान अहमद


वो बच्चा अब भी रोता है
जिसे कुंती ने जन्मा था
मगर दुनिया के डर से
उसको दरिया में बहा आयी
तो एक उम्मीद थी उसको
कि शायद रहम दिल कोई
उठाकर अपने दामन में
उसे पालेगा पोसेगा
मगर अफसोस ऐ दुनिया
न कोई उसका वारिस है
न कोई ग़म गुसार उसका
जरा तुम आंख तो खोलो
कि तुम भी देख सकती हो
वह बच्चा अब भी रोता है
किसी फुटपाथ पर बैठा

1 comment:

नीरज गोस्वामी said...

बेहतरीन नज़्म...लाजवाब...क्या कहूँ...वाह...
नीरज