Saturday, November 8, 2008

खामोश सी रात

SEEMA GUPTA

सांवली कुछ खामोश सी रात,
सन्नाटे की चादर मे लिपटी,
उनींदी आँखों मे कुछ साये लिए,
ये कैसी शिरकत किए चली जाती है....
बिखरे पलों की सरगोशियाँ ,
तनहाई मे एक शोर की तरह,
करवट करवट दर्द दिए चली जाती है....
कुछ अधूरे लफ्जों की किरचें,
सूखे अधरों पे मचल कर,
लहू को भी जैसे सर्द किए चली जाती है...
सांवली कुछ खामोश सी रात अक्सर...

4 comments:

manvinder bhimber said...

करवट करवट दर्द दिए चली जाती है....
कुछ अधूरे लफ्जों की किरचें,
सूखे अधरों पे मचल कर,
लहू को भी जैसे सर्द किए चली जाती है...
सांवली कुछ खामोश सी रात अक्सर...

dil ko chu gai....bahut sunder

Mired Mirage said...

सुंदर रचना !
घुघूती बासूती

seema gupta said...

" firoj jee apne patrika mey jgeh daine ke liye bhut bhut shukriya...

http://mairebhavnayen.blogspot.com/
regards seema gupta

Udan Tashtari said...

वाह!! सीमा जी की उम्दा रचना!!