Saturday, January 10, 2009

एक जनवरी मार्ग


ईशान महेश

‘‘हैप्पी न्यू ईयर।’’ उन्होंने एक चमचमाता सुनहरा कार्ड मेरी ओर बढ़ाते हुए कहा, ‘‘यह आपके लिए इंविटेशन है।’’
‘‘किस बात का न्योता है ?’’ मैंने अभिवादन स्वरूप मुस्कराकर पूछा।
‘‘कल से नया साल शुरू होने जा रहा है न, इसलिए हर साल की तरह इस साल भी हमारा क्लब क्नॉट प्लेस के किसी एक होटल में पार्टी दे रहा है।’’ उन्होंने अपनी छाती फुलाकर बताया, ‘‘इस साल इस क्लब का प्रेसिडेंट मैं हूँ। मैंने सोचा अब घर-घुरसु पड़ोसी को जरा दुनिया दिखवा दूँ।’’ वे जबरदस्ती हँसे, ‘‘मेरी बात का बुरा मत मानना। नए साल पर सब माफ होता है।’’

मन में आया, उनसे पूछूँ कि यह अंग्रेजी नव वर्ष क्या तुम्हारे पूर्वजों का बनाया हुआ है। क्या कभी अंग्रेजों ने दीपावली पर दीए जलाए हैं जो तुम इतने हर्षोल्लास से उनका नव वर्ष मना रहे हो।...किंतु शिष्टाचारवश मन की बात कह न सका और औपचारिकता में कार्ड खोलकर पढ़ने लगा। ‘‘अरे पार्टी रात के दस बजे से एक बजे तक क्यों है ?’’ मैं चौका। ‘‘तुम घर से बाहर निकलोगे तो दुनियादारी का कुछ पता चलेगा।’’ वे हँसे, ‘‘अरे भई, दस बजे तो लोग पीना शुरू करेंगे। सारी विदेशी दारु मँगवाई है। इधर लोग पीना शुरू करेंगे, उधर गर्ल्स डांस करना शूरु करेंगी। पौने बारह बजे तक डांस चलेगा।’’ उन्होंने मुस्कराकर अपने दाँतों से अपना होंठ काटा और अपनी जीभ से इसे गीला करते हुए धीरे से कहा। ‘‘डांस, नॉनवेज है। तुम्हारी तबीयत हरी हो जाएगी और तुम इस पार्टी के इंविटेशन से इंम्प्रैस होकर मेरे पैर पकड़ लोगे ! और कहोगे, ‘‘मुझे अपने क्लब का मैम्बर बना लो।’’

मुझे लगा कि उन्होंने सुबह-सुबह ही मदिरा का सेवन किया है, तभी उल्टी बात कर रहे हैं। मैंने उन्हें टोका, ‘‘अरे भाई, भोजन का नॉनवेज होना तो मेरी समझ में आता है, किन्तु नृत्य भला कैसे नॉनवेज हो सकता है ?’’
‘‘कैसे लेखक हो यार तुम।’’ उन्होंने मुझे धिक्कारा, ‘‘वेज और नॉनवेज का कॉनसैप्ट बड़ा अजीब है। भेड़िए के लिए हरी सब्जियाँ नॉनवेज हैं और गाय के लिए खरगोश का मांस।’’ वे अपनी बात पर स्वयं मुग्ध हुए और ठहाका मार कर हँस दिए, ‘‘खैर आगे का प्रोग्राम सुनो। बारह बजे तक सब पीकर धुत्त हो जाएँगे। जैसे ही बारह बजेंगे, मै होटल के हॉल में लगा बड़ा गुब्बारा फोडूँगा। और दो मिनट के लिए लाइटें बंद कर दी जाएँगी। उस दो मिनट में आप किसी के साथ कुछ भी करें-सब माफ होगा। किसी का मतलब समझ रहे हो न ?

उनकी आँखों से झाँकता पिशाच मुझे मुँह चिढ़ा रहा था, ‘‘और जमकर हो-हंगामा करेंगे। शैम्पेन के फव्वारे छोड़ेंगे। सैक्सी साँग गाएँगे। भद्दे इशारों वाले नाच नाचेंगे। जी भर कर मुँह उठाकर अपने दुशमनों को गालियाँ देंगे। पुलिस की जो टुकड़ियाँ कानून और व्यवस्था बनाने के लिए तैनात होंगी, उनको भी पिलाएँगे। अपनी- अपनी कारों या जीपों के बोनट पर खड़े होकर ठुमके लगाएँगे। और जानते हो एक जनवरी के न्यूज पेपरों के मेन पेजों पर हमारी फोटोग्राफ छपेगी। उस पर लिखा होगा। ‘‘नव वर्ष का स्वागत करते कुछ नवयुवक।’’
अपने देश का वर्तमान देखकर मुझे चक्कर आ गया और मैं अपना माथा पकड़ भूमि पर बैठ गया।

1 comment:

safat alam said...

बहुत ही अच्छे और मधूर लेख प्रस्तुत करते हैं आप, दिल की गहराई से बहुत बहुत धन्यवाद। खूब लिखें और लिखते रहें, हमारी शुभकामनायें आपके साथ हैं, और हम ईश्वर से आपकी सफलता के लिए प्रार्थना करते है।