Sunday, January 11, 2009

आरज़ू के आईने में

-राजेन्द्र राज

अपने बारे में.....
‘‘शायर लिखते नहीं
कलम लिखती है खुद-ब-खुद
ज़ब्बे जब जल्वाफ़रोश होते हैं।’’

1 comment:

बवाल said...

शेर अच्छा है साहब, पर ज़ब्बे को लुग़त में न पाया. आप मानी बतलाइएगा तभी जल्वाफ़रोशी से रब्त समझ आएगा.

---आपका अपना बवाल