Tuesday, January 6, 2009

बड़े मियाँ दीवाने

-राजेन्द्र राज


उम्र चौंसठ के पार हुई
जिस्म से रूह बेज़ार हुई
लड़खड़ा कर चलते हैं
हर हसीन पर गिरते हैं
बड़े मियाँ दीवाने

पान चबाके होठों से
लाल रस टपकाते हैं
टूटी हुई ऐनक को
आँखों पे चढ़ाते हैं
बड़े मियाँ दीवाने

इनके घर के सामने
एक पड़ोसिन रहने आई
मियाँ ने सूरत देखी
और बालों में कंघी घुमाई
बड़े मियाँ दीवाने

पतली कमर तिरछी नज़र
छत्तीस की उम्र में ऐसी फिगर
बाल सुखाने खिड़की पे जो आई
मियाँ ने इंग्लिश धुन बजाई
बड़े मियाँ दीवाने

रात सारी गुजर गई
करवट बदल-बदल कर
सुबह-सुबह मियाँ ने
पड़ोसिन के घर की घंटी बजाई
बड़े मियाँ दीवाने

जाने कहाँ से कुत्ता एक
लपका मियाँ की ओर
मियाँ ने वहाँ से दौड़कर
जान बचाई पतलून गंवाई
बड़े मियाँ दीवाने

हाँफते-हाँफते पहुँचे घर पे
दो गिलास लस्सी चढ़ाई
कफन में लिपटी देह में
थोड़ी सी जान लौट आयी
बड़े मियां दीवाने

एक कंकड़ उठाके मियाँ ने
खिड़की के शीशे पर दे मारा
पड़ोसिन ने गन्दे पानी से
मियाँ को धो डाला
बड़े मियाँ दीवाने

मियाँ ने सोचा यह प्यार है
पहले तकरार फिर इज़हार है
एक रुपये में टेलीफोन नम्बर घुमाया
पड़ोसिन को पार्क में बुलाया
बड़े मियाँ दीवाने

बालों में लगाकर ख़िजाब
हाथों में लेकर गुलाब
काले कुर्ते लाल पाजामे में
मियाँ लग रहे लाजवाब
बड़े मियाँ दीवाने

गली के कुत्तों ने फिर
मियाँ को पार्क पहुँचाया
बूढ़े घोड़े की पीठ पर
जैसे किसी ने चाबुक बरसाया
बड़े मियाँ दीवाने

खाली पड़ी बेन्च पर
जाकर मियाँ निढ़ाल हुए
चार आने के चने लेकर
मोहब्बत करने को तैयार हुए
बड़े मियाँ दीवाने
मियाँ ने घड़ी देखी
पड़ोसिन अब तक नहीं आई
गुलाबी साड़ी में दिखी कोई
और मियाँ ने सीटी बजाई
और मियाँ ने सीटी बजाई
बड़े मियाँ दीवाने

फिर लपककर मियाँ ने
पकड़ी कलाई आवाज लगाई
इतनी देर कर दी आने में
मेरे प्यार को आजमाने में
बड़े मियाँ दीवाने

उसका पति मुस्टण्डा था
जिसके हाथ में डण्डा था
उसने पकड़ा मियाँ को
और जमके चार लगाई
बड़े मियाँ दीवाने

मियाँ की टूटी हड्डी
पहुँच गए हॉस्पिटल
कॉटेज-वार्ड में नर्स ने
मियाँ को दवा लगाई
बड़े मियाँ दीवाने

मियाँ बोले कोई बात नहीं
पड़ोसिन नहीं नर्स ही सही
अपना काम आसान हुआ
दवा-दारू का इंतिज़ाम हुआ
बड़े मियाँ दीवाने।

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