Monday, January 5, 2009

जियो मेरे लाल

-राजेन्द्र राज





माँ ने कहा बेटे से
दिखा कोई कमाल
बेटे ने पड़ोसी की लड़की को
मल दिया गुलाल
जियो मेरे लाल

बेटा बड़ा सयाना है
हर हसीन का दीवाना है
महफिलों और मैखानों में
उसका आना-जाना है

उसके मिथुन से बाल हैं
जैसी जैसी चाल है
कमर में गमछा है
जीन्स में जमता है

हल्के-हल्के धुएँ में
हर रोज़ नहाता है
नुक्कड़ के पनवाड़ी के यहाँ
इसका चालू खाता है

सिनेमा देखने की खातिर
कितना पसीना बहाता है
जीतता है जुए में जब
चार शोर चलवाता है

बेटा बड़ा प्यार है
माँ का दुलारा है
आशिक है थोड़ा-सा
थोड़ा-सा आवारा है

पढ़ता है उपन्यास सुबह
शाम को जिम जाता है
हाथ-पैरों को मरोड़कर
सलमान खान हो जाता है

बाइक पर निकलता है जब
लड़कियों को लपकाता है
हसीन कोई शॉर्ट्स में दिख जाए तो
इसका शॉर्ट-सर्किट हो जाता है

आधी गुजर गई जवानी
खाने-पीने नाचने-गाने में
बाकी रह गई है जो
जाएगी अफ़साने बनाने में

दो नम्बर की दौलत को
दोनों हाथों से लुटाना
कुछ कमी रह जाए तो
गहने-जेवर बेच खाना

माँ ने कहा बेटे से
दिखा कोई कमाल
बेटे ने पड़ोसी की लड़की को
मल दिया गुलाल
जियो मेरे लाल।

1 comment:

Nirmla Kapila said...

kyaakhoob kaha badhaai