Thursday, January 15, 2009

"प्रेम"

SEEMA GUPTA

भावों से भी व्यक्त ना हो,
ना अक्षर में बांधा जाए
खामोशी की व्याकरण बांची
अर्थ नही कोई मिलपाये
अश्रु से भी प्रकट ना हो
ना अधरों से छलका जाए
मौन आवरण मे सिमटा
ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

1 comment:

seema gupta said...

"मेरे इस कविता को यहाँ प्रकाशित करने के लिए बहुत बहुत आभार "

Regards