धर्म का हव्वा और यूनिवर्सिटिया - राही मासूम रजा October 12, 2008 चित्र पर किलिक करें और पढे. Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Labels आलेख Share Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments राजीव रंजन प्रसाद said… डो. फीरोज इस प्रस्तुति का आभार। दुर्लभ आलेख है। रज़ा वास्तव में उस धर्मनिर्पेक्षता के प्रहरी थे जिसके मायने राष्ट्र भूल चुका है। Satyajeetprakash said… इस बात को छद्म-धर्म-निरपेक्षियों को समझने की जरूरत है. इसके बाद शायद मुसलमान भी इस बात को समझें तो देश का भला होगा.
Comments