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नासिरा शर्मा


बहुचर्चित रचनाकार राही मासूम रजा विशेषांक निकालने के बाद अब वाडमय पत्रिका का अगला विशेषांक चर्चित रचनाकार नासिरा शर्मा पर केन्द्रित अंक होगा.अब तक जिन विद्वानों से बात हो चुकी है उनके नाम प्रो रामकली सराफ,प्रो.जोहरा अफजल,प्रो.रमेश शर्मा, प्रो.ई.एम.जुबेरी मधुरेश,प्रेमकुमार,मूलचन्द सोनकर, इकरार अहमद, अनुरूद्ध सिंह, भरत सिंह, मेराज अहमद, प्रताप दीक्षित, अमरीक सिंह दीप ,जयप्रकाश धूमकेतू, संजय सिंह, सिद्धेश्वर सिंह,सुरेश पंडित,हनीफ मदार, आदित्य प्रचंडिया,महेश दर्पण आदि विद्वान नासिरा जी पर लिख रहे है .
अगर आप भी लिखना चाहे तो अवगत कराने का कष्ट करे.
15 दिसम्बर2008 तक अपना आलेख भेज सकते है.
जानकारी के लिए संपर्क करे .
वाडमय पत्रिका ,
बी-4,लिबर्टी होम्स ,
अब्दुल्लाह कालेज रोड, अलीगढ.
9412277331

Comments

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साक्षात्कार जनसंचार का अनिवार्य अंग है। प्रत्येक जनसंचारकर्मी को समाचार से संबद्ध व्यक्तियों का साक्षात्कार लेना आना चाहिए, चाहे वह टेलीविजन-रेडियो का प्रतिनिधि हो, किसी पत्र-पत्रिका का संपादक, उपसंपादक, संवाददाता। साक्षात्कार लेना एक कला है। इस विधा को जनसंचारकर्मियों के अतिरिक्त साहित्यकारों ने भी अपनाया है। विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में, हर भाषा में साक्षात्कार लिए जाते हैं। पत्र-पत्रिका, आकाशवाणी, दूरदर्शन, टेलीविजन के अन्य चैनलों में साक्षात्कार देखे जा सकते हैं। फोन, ई-मेल, इंटरनेट और फैक्स के माध्यम से विश्व के किसी भी स्थान से साक्षात्कार लिया जा सकता है। अंतरिक्ष में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने अंतरिक्ष यात्री कैप्टन राकेश शर्मा से संवाद किया था, जिसे दूरदर्शन ने प्रसारित किया था। इस विधा का दिन पर दिन प्रचलन बढ़ता जा रहा है।
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समकालीन साहित्य में स्त्री विमर्श

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स्त्री-विमर्श के दर्पण में स्त्री का चेहरा

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अब हम इस बात की चर्चा करेंगे कि स्त्रियाँ अपनी इस निर्मित या आरोपित छवि के बारे में क्या राय रखती हैं। इसको जानने के लिए हम उन्हीं ग्रन्थों का परीक्षण करेंगे जिनकी चर्चा हम पीछे कर आये हैं। लेख के दूसरे भाग में वि.का. राजवाडे की पुस्तक ‘भारतीय विवाह संस्था का इतिहास' के पृष्ठ १२८ से उद्धृत वाक्य को आपने देखा। इसी वाक्य के तारतम्य में ही आगे लिखा है, ‘‘यह नाटक होने के बाद रानी कहती है - महिलाओं, मुझसे कोई भी संभोग नहीं करता। अतएव यह घोड़ा मेरे पास सोता है।....घोड़ा मुझसे संभोग करता है, इसका कारण इतना ही है अन्य कोई भी मुझसे संभोग नहीं करता।....मुझसे कोई पुरुष संभोग नहीं कर रहा है इसलिए मैं घोड़े के पास जाती हूँ।'' इस पर एक तीसरी कहती है - ‘‘तू यह अपना नसीब मान कि तुझे घोड़ा तो मिल गया। तेरी माँ को तो वह भी नहीं मिला।''
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