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राही मासूम रजा विशेषांक प्रकाशित


वाडमय पत्रिका

सम्पादक-फीरोज अहमद


मूल्य 75 रूपये india ,विदेशों में 600 रूपए( भारत में मनीआडर पहले भेजे,)
बी-4 लिबर्टी होम्स
अब्दुल्लाह कालेज रोड
अलीगढ 202002
09412277331
सम्पादकीय
कहानी
प्रताप दीक्षित : राही मासूम रजा की कहानियाँ: मनुष्य के ख्वाबों की तावीर
राही मासूम रजा : एक जंग हुई थी कर्बला में
राही मासूम रजा : सिकहर पर दही निकाह भया सही
राही मासूम रजा : खुशकी का टुकड़ा
राही मासूम रजा : एम०एल०ए० साहब
राही मासूम रजा : चम्मच भर चीनी
राही मासूम रजा : खलीक अहमद बुआ
राही मासूम रजा : सपनों की रोटी
आलेख/लेख

राही मासूम रजा : फूलों की महक पर लाशों की गंध
राही मासूम रजा : रामायण हिन्दुस्तान के हिन्दुओं की धरोहर है?
राही मासूम रजा : नेहरू एक प्रतिमा
राही मासूम रजा : शाम से पहले डूब न जाये सूरज
शिव कुमार मिश्र : राही मासूम रजा
कुरबान अली : हिन्दोस्तानियत का सिपाही
हसन जमाल : राही कभी मेरी राह में न थे
सग़ीर अशरफ़ : राष्ट्रीय एकता के सम्वाहकः राही
बाकर जैदी : राही और १८५७
मेराज अहमद : राही का रचनात्मक व्यक्तित्व
मूलचन्द सोनकर : रही मासूम रजा की अश्लीलता?
जोहरा अफ़जल : राही मासूम रजा और आधा गाँव
आदित्य प्रचण्डिया : मैं एक फेरी वाला
सन्दीप कुमार : आधा गाँव एवं टोपी शुक्ला में साम्प्रदायिकता
कनुप्रिया प्रचण्डिया : राही और आधा गाँव
साक्षात्कार/यादें

राही मासूम रजा से सुदीप की अंतरंग बातचीत
राही मासूम रजा के साथ विश्वनाथ की लम्बी बातचीत
नीरज, क़ाजी अब्दुस्सत्तार और शहरयार की यादों के राहीः प्रेम कुमार
मासूम से राही मासूम रजा तक : एम० हनीफ़ मदार
नैयर रजा से प्रेमकुमार की बातचीत
यादों के दायरे
सिनेमा

राही मासूम रजा : यथार्थ लेकिन सेंसर?
राही मासूम रजा : दिलीप कुमारः एक वह हैं जिन्हें तस्वीर बना आती है
राही मासूम रजा : फ़िल्मकार में सामाजिक चेतना नहीं है
राही मासूम रजा : फ़िल्म की भाषा
यूनुस ख्नान : जिन्दगी को संवारना होगाः राही का फ़िल्मी सफर
सिदेश्वर सिंह : आधा गाँव के लेखक का फ़िल्मी सफर
फ़ीरोज ख़ान : राही की कुछ महत्त्वपूर्ण फ़िल्में

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साक्षात्कार

प्रो. रमेश जैन
साक्षात्कार जनसंचार का अनिवार्य अंग है। प्रत्येक जनसंचारकर्मी को समाचार से संबद्ध व्यक्तियों का साक्षात्कार लेना आना चाहिए, चाहे वह टेलीविजन-रेडियो का प्रतिनिधि हो, किसी पत्र-पत्रिका का संपादक, उपसंपादक, संवाददाता। साक्षात्कार लेना एक कला है। इस विधा को जनसंचारकर्मियों के अतिरिक्त साहित्यकारों ने भी अपनाया है। विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में, हर भाषा में साक्षात्कार लिए जाते हैं। पत्र-पत्रिका, आकाशवाणी, दूरदर्शन, टेलीविजन के अन्य चैनलों में साक्षात्कार देखे जा सकते हैं। फोन, ई-मेल, इंटरनेट और फैक्स के माध्यम से विश्व के किसी भी स्थान से साक्षात्कार लिया जा सकता है। अंतरिक्ष में संपर्क स्थापित कर सकते हैं। पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी ने अंतरिक्ष यात्री कैप्टन राकेश शर्मा से संवाद किया था, जिसे दूरदर्शन ने प्रसारित किया था। इस विधा का दिन पर दिन प्रचलन बढ़ता जा रहा है।
मनुष्य में दो प्रकार की प्रवृत्तियाँ होती हैं। एक तो यह कि वह दूसरों के विषय में सब कुछ जान लेना चाहता है और दूसरी यह कि वह अपने विषय में या अपने विचार दूसरों को बता देना चाहता है। अपने अनुभ…

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मौलिक रूप से साक्षात्कार दो तरह के होते हैं -१. प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार २. माध्यमोपयोगी साक्षात्कार
प्रतियोगितात्मक साक्षात्कार का उद्देश्य और चरित्रमाध्यमोपयोगी साक्षात्कार से पूरी तरह भिन्न होता है। इसका आयोजन सरकारी या निजी प्रतिष्ठानों में नौकरी से पूर्व सेवायोजक के द्वारा उचित अभ्यर्थी के चयन हेतु किया जाता है; जबकि माध्यमोपयोगी साक्षात्कार, जनसंचार माध्यमों के द्वारा जनसामान्य तक पहुँचाये जाते हैं। जनमाध्यम की प्रकृति के आधार पर साक्षात्कार भ…