Monday, October 20, 2008

मौत की रफ़्तार

SEEMA GUPTA

आज कुछ गिर के टूट के चटक गया शायद ..

एहसास की खामोशी ऐसे क्यूँ कम्पकपाने लगी ..

ऑंखें बोजिल , रूह तन्हा , बेजान सा जिस्म ..

वीरानो की दरारों से कैसी आवाजें लगी...

दीवारों दर के जरोखे मे कोई दबिश हुई ...

यूँ लगा मौत की रफ़्तार दबे पावँ आने लगी...

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