Wednesday, October 22, 2008

अलीगढ़ में वाड़्‌मय पत्रिका का राही मासूम रजा विशेषांक का लोकापर्ण-विमोचन एवं चर्चा [साहित्य समाचार]

धर्म ज्योति महाविद्यालय-ताहरपुर-अलीगढ़ में वाड़्‌मय पत्रिका का राही मासूम रजा विशेषांक का लोकापर्ण-विमोचन एवं चर्चा हुई। धर्म ज्योति महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ० धर्मेन्द्र सिंह ने इस पत्रिका का विमोचन किया। डॉ० सिंह ने पत्रिका पर चर्चा करते हुए कहा कि मैंने राही मासूम रजा का काफ़ी साहित्य पढ़ा है और जहाँ तक मैंने-सुना और पढ़ा था कि आधा गाँव फ़ारसी लिपि में लिखा गया था बाद में उसका लिप्यांतरण किया गया। लेकिन इस पत्रिका को पढ़कर भ्रम दूर हुआ क्योंकि राही मासूम रजा ने अपने साक्षात्कार में यह जिक्र किया था कि आधा गाँव आधा देवनागरी और आधा उर्दू में लिखा गया था। यही बात उनकी पत्नी ने भी अपने साक्षात्कार में भी कहा है। डॉ० सर्वोत्तम दीक्षित प्राचार्य धर्म ज्योति महाविश्वद्यालय ने कहा-राही मासूम रजा अंक काफी महत्त्वपूर्ण है। राही पर शोध करने वाले शोर्धाथियों और विद्वानों का काफी मदद मिलेगी इसके साथ ही साथ सम्पादकीय पढ़ने से पता चला कि राही रजा पर काफी लोगों ने शोध किया, उसमें से कुछ लोगों ने भ्रम भी फैलाया था जिसका उल्लेख इस पत्रिका में दिया गया है।

इस पत्रिका के सम्पादक-डॉ०एम०फ़ीरोज अहमद ने कहा कि इस पत्रिका में अभी तक राही मासूम रजा के कुछ अनछुए पहलू को छुआ गया है जैसे राही मासूम रजा की कहानियों के बारे में बहुत ही कम पाठक जानते थे और वह आम पाठक तक नहीं पहुँच पायी है और न ही इसका कोई शोध हुआ है। कहानी के अतिरिक्त राही जी ने फ़िल्मों पर काफ़ी आलेख लिखे है और उनके समकालीनों का साक्षात्कार भी इस पत्रिका में है। इस पत्रिका को पढ़ने पर काफ़ी भ्रम की चीजे जो लोगों के द्वारा फैलायी गयी थी पढ़ने से दूर हो जायेगी।

जनवादी लेखक संघ के सदस्य हनीफ़ मदार ने चर्चा करते हुए कहा कि राही मासूम रजा विशेषांक महत्त्वपूर्ण एवं संग्रहणीय है। इस तरह का अंग अभी तक नहीं निकला है। यह एक दस्तावेज का काम करेगी। विवेकानन्द पी०जी० कॉलेज, दिबियापुर-औरैया के हिन्दी प्रवक्ता डॉ० इकरार ने कहा कि राही पर जितना काम अभी तक हुआ है। उस परम्परा को आगे बढ़ाते हुए इस पत्रिका ने राही की कहानी, आलेख , साक्षात्कार, फ़िल्म के बारे में विस्तार से लेखकों ने लिखे है। डॉ० फ़ीरोज ने फ़िल्मों का ब्यौरा दिया है जो काफ़ी महत्त्वपूर्ण दिये है। कहानी और फ़िल्मों का उल्लेख करके इस पत्रिका ने महत्त्वपूर्ण एवं संग्रहणीय अंक बना दिया है।

इन विद्वानों के अलावा डॉ० पी०के०शर्मा, प्रवीन तिवारी एम०एस० उपाध्याय, पूजा अग्रवाल, प्रदीप सारस्वत, के०के० शर्मा, डॉ०डी०के० सिंह, आर०के० महेच्च्वरी, प्रदीप तिवारी डी०पी० पालीवाल, डॉ०रामवीर शर्मा एवं अनेक छात्र-छात्राएं इस अवसर पर मौजूद थे।

3 comments:

bavaal said...

Dr. Rahee Masoom raza jee ke bare main aapka yah lekh kaafee mahatvpoorn hai jee. Aabhar aapke. Likhte rahiyega.

narsing said...

mai ek shodhrthi hu muje rahi sahab ke bare me aur unke upanyaso ki jaan kari chaiye mai secunderabad hyd-bad osmaniya university A.P. KA chatra hu mera mail id pnarsingrao@ymail.com hai cell no.09848333043

narsing said...

mai ek shodhrthi hu muje rahi sahab ke bare me aur unke upanyaso ki jaan kari chaiye mai secunderabad hyd-bad osmaniya university A.P. KA chatra hu mera mail id pnarsingrao@ymail.com hai cell no.09848333043