Saturday, October 18, 2008

विरह का रंग

सीमा गुप्ता
आँखों मे तपीश और रूह की जलन,

बोजिल आहें , खामोशी की चुभन ,

सिमटी ख्वाईश , सांसों से घुटन ,

जिन्दा लाशों पे वक्त का कफ़न,

कितना सुंदर ये विरह का रंग

(विरह का क्या रंग होता है यह मैं नही जानती . लेकिन इतना ज़रूर है की यह रंग -हीन भी नही होता और यह रंग आँखें नही दिल देखता है)

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